Sunday, August 15, 2010


आज़ाद हिंद में हैं हम फिर भी गुलाम हैं
कहा है वो नाम जिस को कहते है आज़ादी

अपने घर में डर डर के रहते हैं हम
सम्भाल कर जाना हर इक से कहते हैं हम
जिन नेताओं को सोंपी थी हमने देश की डोर
वो सब के सब निकले इक नंबर के चोर
औरत ही औरत के ज़ुल्मो की गुलाम है
भ्रूण हत्या और दहेज हत्या इस देश में आम है
प्यार करने वाले यहाँ बेमौत मर गए
जाने कितने बच्चे इज्ज़त की भेंट चढ़ गए
तुम्ही कहो फिर कहाँ से आज़ाद हैं हम
अपने देश में अपने ही लोगो के हाथो बर्बाद हैं हम
ये मै नहीं कहती ये तौ आम आदमी की जुबां है
कहा है वो नाम जिस को कहते है आज़ादी

5 comments:

संजय भास्कर said...

बहुत खूब ......स्वतंत्रता दिवस कि ढेर सारी शुभकामनयें

माधव said...

agreed

M VERMA said...

प्यार करने वाले यहाँ बेमौत मर गए
जाने कितने बच्चे इज्ज़त की भेंट चढ़ गए
सच्चाई तो यही है
देश की हालात का सशक्त बयान ..
सुन्दर रचना

raaaj said...

क्या क़ीमत है आज़ादी की हमने कब यह जाना है अधिकारों की ही चिन्ता है फर्ज़ कहाँ पहचाना है आज़ादी का अर्थ हो गया अब केवल घोटाला है हमने आज़ादी का मतलब भ्रष्टाचार निकाला है आज़ादी में खा जाते हम पशुओं तक के चारे अब आज़ादी के खेल को खेलो फ़िक्सिंग वाले बल्लों से हार के बदले धन पाओगे !आज़ादी में आज हमारा राष्ट्र गान शर्मिन्दा है - देखो! आज़ादी का मतलब हिन्दुस्तान हमारा ह

Anonymous said...

Pehle hume "london" se aadesh milte the ab.."new Delhi" se...bas kami hai to is baat ki humari awwaz bhi suni nahi jaati...kaha ke azad hai hum?