Wednesday, August 4, 2010

तुजे चाहने की कोशिश ....

आज बीते हुए पालो को जब हम ने मुड के देखा तो ... रेत पर पड़े हुए वो हमें जिन्दा मिले। लगा था कभी की वो वही दफ़न हो गए है पर आज मुड कर देखा तो साँस अब भी बाकि थी , उन्ही पालो को आज समेटा और एक कहानी बना ली हैं ... और आज वही ख्याल लव्जो मै उतर आये है यहाँ , पल पल तेरी याद आई ..वो याद जब एक तड़प बन गई तो हम ने उस को एक नाम दे दिया ... वही नाम आज मेरे जीने का मकसद है .... मेरा अक्स है ... वही मेरी पहचान है , लोग मुझे दीवानी कहते है या तो तेरा नाम साथ मै जोड़ लेते है ..क्या कहू इसे अपनी शोहरत या अपनी रुसवाई ... ये तो खामोश इबदाद है तुजे बेइंतहा चाहने की......


palak.......!!!!!!









3 comments:

संजय भास्कर said...

हर शब्‍द में गहराई, बहुत ही बेहतरीन प्रस्‍तुति ।

sunil said...

Sochta hoon dil ki tanhai ko awaaz de doon...apne dil mein chupi se kashish ko..kalam se kagaz mein utar doon....phir socha....jisko kehna chahta hoon..unhone to padhna hi chhod diya hai! aour ajj kal to "IDEA" wale bhi aankh dekhate hai...kagaj pe likha to!!!!

ANISH said...

nice one