Thursday, July 29, 2010

उंगलियाँ ...!!!


जब नाम तेरा प्यार से
लिखती हैं उँगलियाँ
मेरी तरफ ज़माने की
उठती हैं उँगलियाँ
दामन तेरा मेरे हाथ
मैं आया था इक पल
दिन रात उस ही पल से
महेकती है उँगलियाँ
जिस दिन से दूर हो गए
उस दिन से ही हम
बस दिन तुम्हारे आने
के गिनती हैं उँगलियाँ
पत्थर को तराश कर
ना बन पाया एक ताज नया
बस फनकार की जहाँ मै कट जाती है उँगलियाँ

9 comments:

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत खूबसूरत ....

Udan Tashtari said...

सुन्दर अभिव्यक्ति!!

संजय भास्कर said...

बेहद ही खुबसूरत और मनमोहक...

संजय भास्कर said...

मेरे पास शब्द नहीं हैं!!!!
Palak ji aapki tareef ke liyee

mai... ratnakar said...

nice and lively feelings
badhai

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

मंगलवार 3 अगस्त को आपकी रचना ... चर्चा मंच के साप्ताहिक काव्य मंच पर ली गयी है .कृपया वहाँ आ कर अपने सुझावों से अवगत कराएँ .... आभार

http://charchamanch.blogspot.com/

नीरज गोस्वामी said...

लाजवाब रचना ...जितनी बार पढो मन नहीं भरता...एक बात और आपके ब्लॉग पर मधुबाला का चित्र देख बहुत अच्छा लगा...
नीरज

Palak said...

thank u to all u lovely people who comment on this post and always motivate me ....

palak

raaaj said...

tumhari rechana k anuroop iski caption bhi khoobsoorat hai....