Tuesday, July 27, 2010

किस कदर टूकड़ो मै बटा हमारा हिंदुस्तान.....


मौलवी पंडित परेशान आदमी परेसान हे
मुल्क मे चारो तरफ इंसानियत हैरान हे

कागजों के देश का नक्षा बदलता जा रहा हे
किस कदर टुकड़ों में बिखरा अपना हिन्दोस्तान हे

फासला बढता नज़र आने लगा हे किस तरह
फिर नयी इक जुंग की खातिर सजा मैदान हे

दब रहे आतंक में सब लोग सहमे हुए
कैसे कह दे रहनुमा हालात से अनजान हे

सरफरोशी की जिन्होने उनकी यादें रह गयी
आसनों पर वोह हे जिनकी कुर्सियां ईमान हे

कांपती दीवार उड़ाते कैलेंडर बतला रहे
साथियों !! इस और आ रहा कोई तूफ़ान हे

5 comments:

अनामिका की सदायें ...... said...

कांपती दीवार उड़ाते कैलेंडर बतला रहे
साथियों !! इस और आ रहा कोई तूफ़ान हे

बहुत सुंदर सटीक लिखा आपने

आभार.

Palak said...

thanks for ur comment anamika ji

palak

संजय भास्कर said...

बहुत सुंदर सटीक लिखा आपने

अनामिका की सदायें ...... said...

आप की रचना 30 जुलाई, शुक्रवार के चर्चा मंच के लिए ली जा रही है, कृप्या नीचे दिए लिंक पर आ कर अपने सुझाव देकर हमें प्रोत्साहित करें.
http://charchamanch.blogspot.com

आभार

अनामिका

त्रिपुरारि कुमार शर्मा said...

लूट रहा जनता का पैसा चैन लेता और है
कर रहा है मौज़ नेता मर रहा जवान (सेना) है

अच्छे एहसासात हैं...