Tuesday, July 27, 2010


शब् भर तुम्हारी याद मै ऐसे जागते है हम
के चाँद के साथ टहलते रहते हैं हम
जब बिस्तर की सिलवटों को महसूस किया
तोह लगा जैसे
कुछ देर पहले
यहाँ से उठ कर गए हो तुम
पलक

5 comments:

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

खूबसूरत एहसास

M VERMA said...

क्या एहसास है और फिर एहसास को मूर्त रूप देता हुआ चित्र

राम त्यागी said...

बहुत बहुत खूबसूरत ....

कुछ अहसास कितने ना भूलने वाले होते हैं
और कुछ अहसास बस जैसे ओस की बूंदों की तरह सरल और सुन्दर होते हैं

संजय भास्कर said...

महसूस किया तोह लगा जैसे कुछ देर पहले यहाँ से उठ कर गए हो तुम पलक

गजब कि पंक्तियाँ हैं ...
बहुत सुंदर रचना.... अंतिम पंक्तियों ने मन मोह लिया...

संजय भास्कर said...

itni sunder kavitayen . palak ji kaha se itna accha hunar shikha hai aap ne

sanjay bhaskar