Wednesday, June 2, 2010

तेरे जाने के बाद.......


तुझे चाहा था कुछ इस कदर हमने ,
की चाहकर भी हम तुझे पा ना सके,
तू जुदा भी हमसे कुछ इस तरह से है ,
की चाहकर भी हम तुझे भुला ना सके,
एक ख्वाहिश बसी थी इस दिल में की तुझे अपना बना लू,
कई कोशिशो के बावजूद हम इसे हकीकत बना ना सके,
आती है हर रात बस तेरा ही ख्वाब लेकर,
तेरे अक्स को हम अपनी ज़िन्दगी से मिटा ना सके,
एक मंजिल की तलाश में राहे बदल ली हमने,
पर उन राहो पर से तेरे निशाँ हम मिटा ना सके,
होकर ज़माने की भीड़ में सजाई महफिले कई हमने,
फिर भी किसी और को अपना कहकर हम बुला ना सके,
तेरी रुखसत के बाद तो वो खुदा भी रूठ गया हमसे,
यही सोचकर फिर दुआओं में हम हाथ उठा ना सके,
कहता है ज़माना की तू भुल गया होगा हमे अब,
सोचकर भी इस बात को हम अपना ना सके,
तुझसे थी ज़िन्दगी की हर ख़ुशी मेरी,
तेरे बाद कोई और तमन्ना हम जगा ना सके…।


Palak





5 comments:

संजय भास्कर said...

आप बहुत सुंदर लिखती हैं. भाव मन से उपजे मगर ये खूबसूरत बिम्ब सिर्फ आपके खजाने में ही हैं

संजय भास्कर said...

वाह ! कितनी सुन्दर पंक्तियाँ हैं ... मन मोह लिया इस चित्र ने तो !

Prashant Goel said...

Truely Intriguing,
Truely Inspiring,
I could just relate to each & every word...
Keep the gud work on!!

God Bless!

Palak said...

thanks for ur valuable comments ..

Palak

Anonymous said...

aapke naam ki tarah aapke shabd bhi simple aur anmol lagte hain...kitni aasani se kitni saari baatein keh jate ho tum..hazaron panno ki daastan chand shabdon mein kehna shayad koi tumse sikhe..this poem of urs will always be close to my heart..thnx..kp wrtng...snkr..