Saturday, June 5, 2010

इश्क और हया .....!!!!


क्या है रिश्ता
इश्क का हया से

हया
जो इश्क की कुछ नहीं लगती
क्यूँ बावरी है
चल रही है राह पे उसकी

जिस दिन
इश्क ने
हया का माथा चूम लिया
उस दिन से
आँखों की टहनी पे
अश्कों के फल नहीं लगते

उस दिन से ख़्वाबों का
खारापन गया

उस दिन से महक रही है
यादों की संदल
और हया मदहोश है

पगली ये जानती है
ये दीवानगी जान ले के जायेगी

मगर फिर भी
चिराग बुझने से पहले
जो एक पल जी भर के जीता है
वही एक पल मिला है
अब हया को

इसमें जान भी जाए
तो भी ये

सौदा सस्ता..!!

2 comments:

Dheeraj Goel said...

Haya se Ishq ka Nata Purana,
Haya Ishq Pe,
Hamesha Kurbaan Hoti hai.

Jo Pehle vo Juda thi,
Milkar ek Jaan hoti hai.

Ishq ki Hawa mae,
Haya Pehli Saas Hoti Hai,

Bina Haya ke Ishq ki Kaha Pehchan Hoti hai.

संजय भास्कर said...

उस दिन से महक रही है
यादों की संदल
और हया मदहोश है

पगली ये जानती है
ये दीवानगी जान ले के जायेगी


इन पंक्तियों ने दिल छू लिया... बहुत सुंदर ....रचना....