Tuesday, September 2, 2008



तुम पूछो और मैं न बताऊ ऐसे तो हालात नही ,
एक जरा सा दिल टूट है और कोई बात नही
किसको ख़बर थी सवाले बदल भी बिन बरसे उड़ जाते है
सावन आया लेकिन अपनी किस्मत मै बरसात नही..
टूट गया जब ये दिल तो फ़िर ये साँस का नगमा क्या माने ..
गूंज रही है वो शेहनाई जब वो बात ही नही ,
ग़म के अंधेरे मै किसे मै अपना मानु,
जब साया ही साथ नही ...
माना जीवन मै महोब्बत एक बार ही होती है
क्या तू जी पायेगा महोब्बत को छोड़ कर
क्यों तू परेसान है मेरे नसीब को ले कर..
जैसे मै पत्थर हु या मेरे सीने मै जस्बात ही नही....?????


palak

2 comments:

Anonymous said...

तुम्हारे लिए…
वादा नही कर रहा हूँ कोई तुमसे
क्यूंकि वादों की उमर बड़ी छोटी होती है
टूटने की खनक भी सुनाई नही देती
सरे सपने भी संग ले जाती है
चाहत का इरादा बाँध लाया हूँ
दिल में? तुम्हारे? लिए
इरादों की? डोर बड़ी पक्की होती है
Pearl...

Yudhisthar raj said...

तुम पूछो और मैं न बताऊँ ऐसे तो हालात नहीं
एक ज़रा सा दिल टूटा है और तो कोई बात नहीं

क़तील शिफ़ाई