Friday, February 24, 2012

मैं और मेरी तन्हाई अक्सर ये बाते करते है ........!!!!


आईने में चेहरा अपना देखा,
और तस्वीर तेरी नज़र आई..
ए- सितमगर आज मुझे,
तेरी बेवफाई फिर नज़र आई..
मिटा नही पाया तेरी कमी दिल से कभी,
आज मुझे अपनी यह मज़बूरी नज़र आई..
दर्द से जिंदा रहने का एहसास होता है,
ऐसे हालात में फंसी मुझे अपनी जिंदगी नज़र आई..
जिस पल तू खो गया कहीं भीड़ में,
उस पल से मुझे अपनी जिंदगी रुकी नज़र आई..
दो -चार ख़ुशी की बूंदें चाहे गिरी हो मुझ पर,
पर उसके बाद तो गम की बरसात नज़र आई….
जाने क्या बात थी तुझमें और तेरी यादों में,
आँखों ने तो रो दिया,पर होठों पर हंसी नज़र आई..!!!



5 comments:

Anonymous said...

After so many months... nice to read such nice poems...

~!Pearl...

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत खूब ...

संजय भास्कर said...

.... प्रशंसनीय रचना - बधाई

संजय भास्कर said...

.मन में उतर जाती हैं आपकी कवितायें...

वन्दना said...

वाह ………दिल की बातें दिल ही जाने।