Thursday, August 18, 2011

लगा चुनरी मैं दाग ...छुपाऊ कैसे .... ..!!!


कितनी प्यारी 
कितनी रंगीन 
कांच की चूड़ी जैसे एक लड़की 
तनहा बैठी अपने ही खयालो मैं गूम सी 
जाने किस खयालो से झगडती ..
उस का हाथ कलाई पर था 
और वो कुछ कुछ खौफजादा थी 
सोचती हुए 
के अब क्या होगा..?
मै भी उस के पास ही बैठा
पुछा कुछ डर कर 
क्या किस्सा  है  ??
उस की आखें भीग गई..
और बोली सहेम कर
देखो मुझे 
"जो तेरी सुंदर कांच की चूड़ी थी
वो टूट गई "



8 comments:

Sawai Singh Rajpurohit said...

बहुत सुंदर रचना

Sawai Singh Rajpurohit said...

ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है!
आप से निवेदन है इस लेख पर आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रिया दे!

तुम मुझे गाय दो, मैं तुम्हे भारत दूंगा

संजय भास्कर said...

अपने भावो को बहुत सुंदरता से तराश कर अमूल्य रचना का रूप दिया है.

NEELKAMAL VAISHNAW said...

नमस्कार....
बहुत ही सुन्दर लेख है आपकी बधाई स्वीकार करें

मैं आपके ब्लाग का फालोवर हूँ क्या आपको नहीं लगता की आपको भी मेरे ब्लाग में आकर अपनी सदस्यता का समावेश करना चाहिए मुझे बहुत प्रसन्नता होगी जब आप मेरे ब्लाग पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएँगे तो आपकी आगमन की आशा में........

आपका ब्लागर मित्र
नीलकमल वैष्णव "अनिश"

इस लिंक के द्वारा आप मेरे ब्लाग तक पहुँच सकते हैं धन्यवाद्
वहा से मेरे अन्य ब्लाग लिखा है वह क्लिक करके दुसरे ब्लागों पर भी जा सकते है धन्यवाद्

MITRA-MADHUR: ज्ञान की कुंजी ......

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

Bahut Sunder ...sanvedansheel rachna

Palak said...

Sawai Shingh Rajpurohitji, Sanjay ji, Nellkamal ji, Monika ji.. aap sab ne meri rachna ko saraha...is ke liye bahot bahot dhanywad....

Palak

राकेश कौशिक said...

मार्मिक

NEELKAMAL VAISHNAW said...

अग्रिम आपको हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं आज हमारी "मातृ भाषा" का दिन है तो आज हम संकल्प करें की हम हमेशा इसकी मान रखेंगें...
आप भी मेरे ब्लाग पर आये और मुझे अपने ब्लागर साथी बनने का मौका दे मुझे ज्वाइन करके या फालो करके आप निचे लिंक में क्लिक करके मेरे ब्लाग्स में पहुच जायेंगे जरुर आये और मेरे रचना पर अपने स्नेह जरुर दर्शाए..
MADHUR VAANI कृपया यहाँ चटका लगाये
MITRA-MADHUR कृपया यहाँ चटका लगाये
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