Monday, October 11, 2010

इश्क है तुज से आज भी ....


मेरे जिस्म मे जान जबतक रहेगी
तेरा नाम सांसोंमें घुलता रहेगा
महकती रहेगी जिंदगी यूं हमेशा
और ये समा भी महकता रहेगा

जैसे कोई हो युगोंकी तपस्या
ये सफ़र भी तो वै्से ही चलता रहेगा
मिले ना मिले मंजिलोंका सहारा
रास्ता मेरे कदमोंको मिलता रहेगा

मेरे चाहतोंकी गहराईयोंमे
तेरे दिल का अक्स यू खिलता रहेगा
कोई रंजिशे, गम या कोई गिला भी
दुआओंमे मेरी बदलता रहेगा

कहते है सच्चे दिल से जो चाहो
एक दिन तुम्हारा वो बनके रहेगा
पिघलता है पत्थर भी यारा जहांपे
इश्क तो मोम है, वो पिघलके रहेगा


पलक

7 comments:

विवेक Call me Vish !! said...

bahut sundar ...dost!!

likhte raho !!

Jai Ho Mangalmay Ho

संजय भास्कर said...

truly brilliant..
keep writing.....all the best

संजय भास्कर said...

सुंदर प्रस्तुति....

नवरात्रि की आप को बहुत बहुत शुभकामनाएँ ।जय माता दी ।

M VERMA said...

पिघलता है पत्थर भी यारा जहांपे
इश्क तो मोम है, वो पिघलके रहेगा
यकीनन ..
बहुत सुन्दर भाव

दीप्ति शर्मा said...

kya bat hai bahut khub

kabhi yaha bhi aaye
www.deepti09sharma.blogspot.com

avinash kumar singh said...

nice one :-)

avinash kumar singh said...

please visit my blog @ avinashsinghballia.blogspot.com