Wednesday, November 4, 2009

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प्यार इबादत है न रूहानी
एहसास और न ही अब खुदा है
बस मुफ्त में जिस्मानी
भूख मिटाने का महज इक सौदा है
कल तक हवश को मिटाने
जाते थे बदनाम बस्तियों में लोग
वो आज हमारी ही बस्तियों
में अब बे -तकल्लुफ मौजूद हैं ...!!!
Some Lines ...which i like the most .. palak **PG**

2 comments:

Anonymous said...

I think this isnt require a comment....

~Pearl...

deepu said...

agree with u