Thursday, March 26, 2015
Wednesday, March 25, 2015
सासो का बसर तुम से तुम्ही तक है ,
हा मेरी महोब्बत तुम से तुम्ही तक है ,
जस्बा - ए - इश्क़् सच न होता तो रास्ता बदल लैते ,
मिटे हुए रस्तो का गुजर तुम से तुम्ही तक है ,
मेरे हमसफ़र् इन चहतो के रंगो मै ,
हर रंग मेरा तुम से तुम्ही तक है
आज जिन्दगी से कुछ् यु मुलक़ात् हुए ..
कि लगा जिन्दगी का हर लम्हा ...
तुम से तुम्ही तक है.......
पलक
Wednesday, March 12, 2014
वो खत ..
आज एक पुरानी याद से अचानक सामना हो गया
ना जाने क्यु उस खत को देखकर रो पडे ..
उस खत मे जो अजाब् था..
कुछ सुखे हुए गुलाब थे ...
कुछ सवाल थे ..
कुछ जवाब थे ...
कही हसी थी ..
कही दर्द था ...
कही जूठा गुस्सा ..
तो कही बेबाक महोब्बत के इकरार थे ..
उस खत कि सिहायि का रंग
आज भी सुर्ख लाल था...
उस खत के हर कोने पर ..
महोब्बत के निशान थे...
वो खत हमारी महोब्बत के गवाह थे ....
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