Friday, July 8, 2011


मासूम महोब्बत का बस इतना सा फ़साना है
रेत की हवेली है ..बारिश का अफसाना है
क्या शर्त -ऐ-महोब्बत है
क्या शर्त-ऐ-ज़माना है
आवाज़ भी ज़ख़्मी है और गीत भी गुनगुनाना है
उस पार उतेरने की उम्मीद बहोत कम है
कश्ती भी पुरानी है और तूफान को भी आना है
समजे या ना समजे वो अंदाज़ महोब्बत का
एक शक्स को अखो से एक शेर सुनना है
भोली सी अदा
कोई फिर इश्क की जिद पर है

फिर आग का दरिया है और डूब कर जाना है

Tuesday, June 14, 2011




वो ना आये पर उनकी याद आकर वफ़ा कर गयी,
रही तमना हर वक़्त मिलने की मेरे अमन सुकून तबाह कर गयी,
दर पर आहट सुनी कई बार सोचा असर दुआ कर गयी,
दरवाज़ा खोला तो कोई नहीं था मजाक हमारे साथ हवा कर गयी

फिर मिलना उसका....




ज़िन्दगी में, मिल गया फिर वो,
एक रात की बात थी
कुछ कह नहीं पाए हम
वक़्त की बात थी
आँखों से आसू बरसते रहे
जस्बात की बात थी
कुछ ना कहा कर भी, सब कह गया वोह,
अंदाज़ की बात थी ..
चाह कर भी ना रोक सके उसे हम,
हालत की बात थी
वो किसी और का था
किस्मत की बात थी
यह कहना ना किसी से तुम
राज़ की बात है



Saturday, April 30, 2011

वफ़ा ...!!!!!!




तुम मुझे मौक़ा


तोह दो ऐतबार बन’ने
का
थक जाओगे चाहते चाहते


मेरी वफ़ा के
साथ !!!

Sunday, March 6, 2011

महोब्बत ठहर जाती है..!!


हम अक्सर यह समझते हैं
जिसे हम प्यार करते है
उसे हम भूल बैठे हैं
मगर ऐसा नहीं होता
मोहब्बत धीमी आग है
महोब्बत ठहर जाती है !!!

हमारी रूह मै कही
मोहब्बत बैठ जाती है
भूलना चाहते है
मगर यह कम नहीं होती
किसी भी दुःख की सूरत में
कभी कोई ज़रुरत में
कभी अनजान से ग़म में
कभी लहजे की ठंडक में
उदासी की ज़रुरत में
कभी बारिश की सूरत में
हमारी आँख की नमी मै

कभी सपनो की किरच मै
कभी कतरे की सूरत में
वो आ ही जाती है
कभी ऐसा लगता है
उसे हम भूल बैठे हैं
मगर ऐसा नहीं होता ...
मगर ऐसा नहीं होता....
यह हरगिज़ कम नहीं होती...
महोब्बत ठहर जाती ....

Friday, March 4, 2011


ता क़यामत सोचकर देखा
तेरा चेहरा फिर अगर में देख लू

बस एक बार ..
शुक्र करते करते बाकि ज़िन्दगी कर दूँ में गुज़र ..

WISH



ए मुहोब्बत में तेरी अदा'ओं से हु परेशां
जिसे इतना चाहा उसे ही पाने की ख्वाहिश नहीं ..