Wednesday, January 27, 2010

वो शक्श ......!!!


मेरे लिए कुछ ख़ास है वो शक्स...
मेरे लिए मेरी रूह है वो शक्स...

जिसकी बातों ने मुज को मुझसे से चुरा लिया,
मेरे लिए मेरी साँसे है वो शक्स...

जिसकी हर एक अदा ने मुझे पागल बना दिया.
मेरे लिए मेरी सारी खुशिया है वो शक्स...

जिसे खुश देख कर मेरा दिल खुश हुआ,
मेरे लिए मेरा नूर है वो शक्स...

जिसे मै अपना साया कह सकू,
मेरे लिए मेरी ज़िन्दगी ही है वो शक्स...
PG


Thursday, December 24, 2009

तेरी चाहत ...!!!


मजबूरी और बेबसी का जो है आलम,
निजात उससे पाने की चाहत है,
इंसानों को अब इंसानियत की है ज़रुरत,
बस उनको यह समझाने की चाहत है

की चाहतें तो हजारों पाल बैठे हैं,
पर न पता किस चाहत की हमसे क्या चाहत है,
की भूल बैठे ज़माना खुशियों का,
न जाने ग़मों को हमसे इतनी क्या चाहत है

चाहते तो हम भी थे चाहतों की हद्द तक,
पर न जाने क्यूँ चाहतों को हदों में सिमटने की चाहत है,
सिमटने से रोका काफी बार इन चाहतों को,
न जाने क्यूँ इन्हें शर्मा जाने की चाहत है

पर हम भी नहीं आशिक कच्चे उनके,
कर देंगे उन्हें बेपर्दा, भले उन्हें इज्ज़त से चाहत है,
हम नहीं छोडेंगे चाहत उनकी,
हमें उनकी चाहत को अपना बनाने की चाहत है
Palak G

Wednesday, December 9, 2009

*****

अंधेरे रास्तों मैं यु तेरी आंखे चमकती हैं
खुदा की बरकतें जैसे पहाड़ों पर उतरती है
महोब्बत करने वाले जब कभी आंसू बहाते हैं
दिलों के आइने धोती हुए पलकें सवरती हैं
धुआं सी बदलिओं को देख कर अक्सर वो कहती है
हमेशा चांदनी मैं बेवफा रूहें भटकती है
हमारी जिन्दगी मैं फूल बनकर कोई आया था
उसी की याद मई अब तक ये फिजा महकती है
मुझे लगता है दिल खीच कर चला आता हैं हाथों पर
तुजे लिखू तो मेरी उगलियाँ ऐसे धड़कती हैं
पलक ( PG )

Tuesday, November 10, 2009

दिल मेरा ले के जान मांगे है ,
वो मेरा इम्तहान मांगे है ,
घर की दीवारों ने उठाया सर ,
कान तो है पर जुबान मांगे है ,
अपनी आंखों मे आसमान भर के ,
मन का पंछी उडान मांगे है ,
जिन्दगी पर खफा ये दिल मेरा ,
जिन्दगी महेरबान मांगे है ,
चाँद तारें मैं उस को देती हु ,
वो मगर आसमान मांगे है ,
छीन ले जाएगा उसे कोई ,
उस को सारा जहाँ मांगे है ,
पलक PG

Monday, November 9, 2009

दुआ

यार बचपन का कोई पुराना मिले,
काश गुजरा हुआ वो जमाना मिले
वर्ना दिल के धड़कने का मतलब ही क्या ?
दिल मिला है तो दिल का लगना मिले
मेरी खामोशियों को तू सुन गौर से,
इन मैं मुमकिन है तेरा फ़साना मिले
जब बहाना ही बाकि बचा ना कोई
फ़िर नया कोई कैसे बहाना मिले ?
आरजू हसरते जिस को तडपाये ना,
ऐसा मस्ती भरा दिल दीवाना मिले
ज़ख्मी दिल फूल बन कर महकने लगे
तेरी यादों का मौसम सुहाना मिले
घर तेरा दूर से कब तलक देखे हम,
तेरे घर आने का कुछ बहाना मिल
जानती हु सयानो की बस्ती है ये
कोई तो एक इन बस्ती मैं दीवाना मिले
दुआ है रब से .... जो हमें जमाना मिला
अब किसी को ना ऐसा जमाना मिले ......
पलक

Wednesday, November 4, 2009

*****

प्यार इबादत है न रूहानी
एहसास और न ही अब खुदा है
बस मुफ्त में जिस्मानी
भूख मिटाने का महज इक सौदा है
कल तक हवश को मिटाने
जाते थे बदनाम बस्तियों में लोग
वो आज हमारी ही बस्तियों
में अब बे -तकल्लुफ मौजूद हैं ...!!!
Some Lines ...which i like the most .. palak **PG**

Saturday, October 24, 2009

तेरे साथ हु मैं ....!!!!!


थक जाओ गर पथरीले रास्तों पे चलते हुए
कभी सोच न लेना की वहां तनहा हो तुम
मूँद कर पलकों को अपनी जो तुम देखोगे
अपने साथ ही सदा मुझ को पाओगे तुम

हर वक्त बुरा कट जात है, यकीन करना
आँखों मैं कभी तुम अश्क न भर लेना
धुंध बढ़ जाए, मुस्कराहट खोने लगे
अपनी दुआओं मैं मुझ को पाओगे तुम

इश्क नाम तो नहीं है मिलन का, दीदार का
दिल से दिल का मिल जाना है नाम-ऐ-मोहब्बत
जो याद आ जाए मेरी, न समझना की दूर हूँ
अपने सीने मैं धड़कता मुझ को पाओगे तुम

वक्त की गर्मी जो झुलसाने लगे वुजूद
मेरी चाहत की नमी को महसूस करना
जो सर्द हवां ज़माने की आने लगें पास
मेरी वफाओं की गर्मी को महसूस करना
मैं तुमसे जुदा तो नहीं हूँ मेरे हमदम
अपने साथ ही सदा मुझ को पाओगे तुम !!
PG