Saturday, August 18, 2018

आज वो सूखा गुलाब दिखा,

उस डायरी के पीले पन्नों में।

याद है? तुमने कहा था

जब आओगे तब नज़र भर देखेंगे उन्हें,

आज वो पन्ने बिखर रहे हैं,

अक्षरों की स्याही घुल रही है वक़्त में,

लेकिन तुम्हारे आने का इंतजार आज भी है।

हर आने वाले खत पर लगता है,

ज़रूर बर्फीली पहाड़ियों से तुमने भेजी होंगी,

दरवाज़े की हर खट-खट पर लगता है,

तुम खड़े होगे,

मेरे मनपसंद फूल लिए

वो कहते हैं ना

सुकून मिलता है उम्मीद में,

सामने एक मढ़। हुआ मेडल रखा है

और तुम्हारी वर्दी भी,

एक बार आकर देख तो जाओ

कितने करीने से संजोई है तुम्हारी हर एक याद,

मगर जानती हूं कभी लौटोगे नहीं तुम...हमेशा के लिए जो अकेला कर गए हो।

Friday, July 20, 2018

रास्ते जुदा होने से अहसास मिटा नहीं करते,

हम तब भी महकेंगे जब मौसम पतझड़ के होंगे...!!!

Monday, July 16, 2018

ये और बात है कि.......वो निभा न सके,

पर जो किये थे वादे उसने, वो कमाल के थे...!!!

Monday, July 9, 2018

कुछ तस्वीरें चाहे कितनी भी ब्लैक & वाइट हो,
लेकिन ज़माने पर वो अपने गहरे रंग छोड़ जाती है...

उम्र चाहे कितनी भी छोटी रही हो,
लेकिन यादें उनकी दिलों में अमर हो जाती है...

अदाकारी हो या फ़िर जीने की अदा,
हर किरदार को वो अपनी खूबसूरती से महका जाती है...

कई सारे राज़ अपने साथ दफ़न करके,
वो ज़माने की बदसूरती को अपनी मौत में समेट जाती है...!

येशा

Sunday, July 8, 2018

मुझसे बिछड़ के ख़ुश रहते हो
मेरी तरह तुम भी झूठे हो

इक टहनी पे चाँद टिका था
मैं ये समझा तुम बैठे हो

उजले उजले फ़ूल खिले थे
बिल्कुल जैसे तुम हँसते हो

मुझको शाम बता देती है
तुम कैसे कपड़े पहनें हो

तुम तन्हा दुनिया से लड़ोगे
बच्चों सी बातें करते हो!

'बशीर बद्र'

लौट आयी हैं देखो...

बारिशें फिर से यहां वहा ...

इक तुमको ही...

लौट के आने की फुरसत नही....

Friday, June 29, 2018


एक सिरा ज़िंदगी का बंधा है तुझसे ,

जिस में बंध कर महसूस होता है .......!

कुछ रिश्ते बेनाम रह कर भी कितने करीब होते हैं...

दूर ही सही एक मुकम्मल इश्क की ताबीर होते हैं ......!!!