Sunday, August 7, 2011





पिछले प्रहर की रात थी 
तन्हाई और तेरी याद थी 
वही कही से चाँद आ गया सिराहने तक 
पूछने लगा 
जिन्दगी कैसी है ..? 
मैंने कहा कोई खास नहीं 
वही हस कर फिर से पुछा 
क्या चाहते हो ..?
मैंने कहा कोई चाहत नहीं 
कोई आस नहीं 
वही फिर मुस्कुराया और पुछा 
कभी प्यार किया है ..?
मैंने कहा कुछ याद तोह नहीं 
फिर नज़ारे चुराते बोला 
कही धोका को नहीं दमन मैं ?
मैंने कहा ऐसे कोई बात नहीं 
चाँद बोला 
तोह फिर तुम से एक बात कहू 
मैंने कहा कोई एतराज़ नहीं 
तोह बोला 
तुम ने भी ता  उम्र प्यार किया है 
और आज वो साथ नहीं 
मैंने कुछ न कहा बस 
हस कर कहा 
तुम्हारी चांदनी भी तो तुम्हारे साथ नहीं 
आज कही अमवस्या तो नहीं ....



Saturday, August 6, 2011

अनोखा प्यार....


चलो तुम  साथ  मत  देना  
मुझे  बेशक  भुला  देना 
नए  सपने  सजा  लेना 
नए रिश्ते बना लेना  
भुला देना सभी वादे 
सभी कसमे ..सभी नाते ..
मगर 
अब तुम किसी से भी 
ऐसा अनोखा प्यार मत करना

Thursday, August 4, 2011

"कितनी महोब्बत है तुम से "

कब से कहने की हिम्मत जुटा रहे है 
के तुम से इज़हारे महोब्बत कर ले 
पर  न जाने आज ऐसा क्या हुआ 
के दिल ने कहा की 
कह ही दू आज 



जब किताब के पन्नो की सफेदी 
तुम्हारे चेहरे पर छलकती है 
दिल कही रुक सा जाता है 

जब हसी की एक ठंडी लहर 
मेरे कानो मई गूंजती है 
वक़्त कही थम सा जाता है 

ना जाने आज ऐसा क्या हुआ 
दिल ने कहा 
की कह दू आज 
"कितनी महोब्बत है तुम से "

Friday, July 8, 2011


मासूम महोब्बत का बस इतना सा फ़साना है
रेत की हवेली है ..बारिश का अफसाना है
क्या शर्त -ऐ-महोब्बत है
क्या शर्त-ऐ-ज़माना है
आवाज़ भी ज़ख़्मी है और गीत भी गुनगुनाना है
उस पार उतेरने की उम्मीद बहोत कम है
कश्ती भी पुरानी है और तूफान को भी आना है
समजे या ना समजे वो अंदाज़ महोब्बत का
एक शक्स को अखो से एक शेर सुनना है
भोली सी अदा
कोई फिर इश्क की जिद पर है

फिर आग का दरिया है और डूब कर जाना है

Tuesday, June 14, 2011




वो ना आये पर उनकी याद आकर वफ़ा कर गयी,
रही तमना हर वक़्त मिलने की मेरे अमन सुकून तबाह कर गयी,
दर पर आहट सुनी कई बार सोचा असर दुआ कर गयी,
दरवाज़ा खोला तो कोई नहीं था मजाक हमारे साथ हवा कर गयी

फिर मिलना उसका....




ज़िन्दगी में, मिल गया फिर वो,
एक रात की बात थी
कुछ कह नहीं पाए हम
वक़्त की बात थी
आँखों से आसू बरसते रहे
जस्बात की बात थी
कुछ ना कहा कर भी, सब कह गया वोह,
अंदाज़ की बात थी ..
चाह कर भी ना रोक सके उसे हम,
हालत की बात थी
वो किसी और का था
किस्मत की बात थी
यह कहना ना किसी से तुम
राज़ की बात है



Saturday, April 30, 2011

वफ़ा ...!!!!!!




तुम मुझे मौक़ा


तोह दो ऐतबार बन’ने
का
थक जाओगे चाहते चाहते


मेरी वफ़ा के
साथ !!!