Friday, March 4, 2011

WISH



ए मुहोब्बत में तेरी अदा'ओं से हु परेशां
जिसे इतना चाहा उसे ही पाने की ख्वाहिश नहीं ..



तेरी सिर्फ एक ही बात
मुझे ज्यादा याद आती है .....



तेरा यह कहना ,
तुम मेरे होना चाहते हो ...

Saturday, February 19, 2011


कौन कहता है वो मेरे बगैर तन्हा होगा
वो अक चिराग है कही और जलता होगा

यह तो हम हैं एक सुकून सी जील
पर वो तो एक बिखरा हुआ एक दरिया होगा
वो तो रहता होगा बेखबर से जूनून मैं
उसे क्या खबर कोई उसे सोचता होगा


वो मेरे दर्द से बे खबर नहीं था मगर
उस दुःख बाटने का ना सलीका आता होगा

इतना नादान नहीं के समाज भी ना सके
उसी का जिक्र मेरी हर ग़ज़ल मैं हुआ होगा

मैं ने उसे चाह तो चाहती ही गई
मेरी शिद्दतो से घबरा कर वो चल दिया होगा


Thursday, February 10, 2011


न मिला दिल का कदरदान इस ज़माने में,
यह शीशा टूट गया है देखने और दिखने में,
जी में आता है एक रोज़ शमा से पूछू ,
मज़ा किस में है, जलने में या जलाने में.

Friday, February 4, 2011

रिश्ते ....!!!!!!


अक्सर रिश्तों को रोते हुए देखा है,
अपनों की ही बाँहो में मरते हुए देखा है
टूटते, बिखरते; सिसकते,कसकते
रिश्तों का यही है इतिहास,
जो दिल पे लिखा है बेहिसाब !
प्यार की आँच में पक कर पक्के होते जो,
वे कब कौन सी आग में झुलसते चले जाते हैं,
झुलसते चले जाते हैं और राख हो जाते हैं !
क्या वे नियति से नियत घड़िया लिखा कर लाते हैं ?
कौन सी कमी कहाँ रह जाती है कि वे अस्तित्वहीन हो जाते हैं,
या एक अरसे की पूर्ण जिन्दगी जी कर,
वे अपने अन्तिम मुकाम पर पहुँच जाते हैं!
मैंने देखे हैं कुछ रिश्ते धन-दौलत पर टिके होते हैं,
कुछ चालबाजों से लुटे होते हैं
गहरा धोखा खाए होते हैं
कुछ आँसुओं से खारे और नम हुए होते हैं,
कुछ रिश्ते पुराने रिश्तो की कब्र पर बने होते हैं,
जो कभी पनपते नहीं, बहुत समय तक जीते नहीं
दुर्भाग्य और दुखों के तूफान से बचते नहीं!
स्वार्थ पर बनें रिश्ते बुलबुले की तरह होते हैं
कुछ देर बने रहते हैं और गायब हो जाते हैं;
कुछ रिश्ते दूरियों में ओझल हो जाते हैं,
जाने वाले के साथ दूर चले जाते हैं !
कुछ नजदीकियों की भेट चढ़ जाते हैं,
कुछ शक से सुन्न हो जाते हैं !
कुछ अतिविश्वास की बलि चढ़ जाते हैं!
फिर भी रिश्ते बनते हैं, बिगड़ते हैं,
जीते हैं, मरते हैं लड़खड़ाते हैं, लंगड़ाते हैं
तेरे मेरे उसके द्वारा घसीटे जाते हैं,
कभी रस्मों की बैसाखी पे चलाए जाते है !
पर कुछ रिश्ते ऐसे भी हैं
जो जन्म से लेकर बचपन ,
जवानी -बुढ़ापे से गुजरते हुए,
बड़ी गरिमा से जीते हुए
महान महिमाय हो जाते हैं !
ऐसे रिश्ते सदियों में नजर आते हैं !
जब कभी सच्चा रिश्ता नजर आया है
कृष्ण की बाँसुरी ने गीत गुनगुनाया है... !
आसमां में ईद का चाँद मुस्कराया है...!
या सूरज रात में ही निकल आया हैं .....!
ईद का चाँद रोज नहीं दिखता,
इन्द्रधनुष ही तो कभी कभी खिलता है!
इसलिए शायद -
सच्चा रिश्ता सदियों में दिखता है,
मुश्किल से मिलता है ...
पर दिखता है, मिलता है, यही क्या कम है ॥ !!!
एक प्यारा और सच्चा रिश्ता ....!!!!!!!

Wednesday, January 19, 2011

डर लगता है..!!


ना चाहो इतना हमें चाहतो से डर लगता है
ना आओ करीब इतना के जुदाई से डर लगता है
सुना है मोहब्बत क़ुरबानी मांगती है
क़ुरबानी देने से अब डर लगता है
तुम्हारी वफाओं पर यकीन है
अपनी जात से डर लगता है
सोचा ना थी किसी को इतना चाहेंगे
अब तो अपनी सोचो से भी डर लगता है

Wednesday, January 12, 2011

मोहब्बत क्या है?

किसी ने पुछा मोहब्बत किया है?

समंदर ने कहा....
मोहब्बत समंदर के गहराइयो में छिपे हुए एक सीपी हैं .. जिस में
चाहत जैसा अनमोल मोती मोजूद है.

बादल ने कहा ....
मोहब्बत एक धनक है . जिस में हर रंग इन्द्रधनुष होता है...

शायर ने कहा....
मोहब्बत एक ऐसी ग़ज़ल है , जो हर एक सुनने वाले के दिल में
समाती चली चली जाते है ...

साज़ ने कहा ....
मोहब्बत एक ऐसा गीत है .. जो दिलमें समां जाता है ...

माली ने कहा....
मोहब्बत गुलशन के फूल के वोह दिलकश खुशबू है... जिस में सारा
गुलशन महक उठता है...

आँखों ने कहा ....
मोहब्बत आंसू का समंदर है.. जो किसी के इंतज़ार में ख़ामोशी से
बहता है...

दिल ने कहा ....
मोहब्बत किसी को ख़ामोशी से चाहे जाने का नाम है... के आखरी
वक़्त भी इज़हार ना किया जाये ...

नसीब ने कहा ....
मोहब्बत वाला दुनिया का खुश किस्मत तरीन इंसान है ॥


और जिस के दिल में मोहब्बत नहीं... वोह दुनिया का बद्द तरीन शख्स है...

नफरत ने कहा ....
आखिरी जीत मोहब्बत की होती है




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