Wednesday, December 22, 2010

बिखरे लम्हात .....!


तेरा हाथ थामे चले थे हम
जब जिंदगी की राह में
आज पूछता है दिल मेरा मुझसे
वो लम्हे हसीं किधर गये


वो मुस्कुराती हुए जिंदगी हर पल
और हसीं ख्वाब थे आँखों में
आज पूछते हैं खुद से हम की
वो रात दिन किधर गए

कभी एक पल भी इक दूजे से होके
जुदा जी ना पाते थे हम
आज जाने कैसे ये दिन ये साल
मेरे तेरे बिन गुजेर गए

जाने वो पल किधर गए ....

अब

कैसे बीते

कैसे जिए

कहा गए ....
क्या करे ये सोच कर
बस ये तो सिर्फ
जाने मेरा रब

जिसके हाथों छुटी मेरे सांसो की डोर ......

Tuesday, November 16, 2010

तेरी मेरी बाते ....


तेरी और मेरी गुफ़्तगु हमारे बीच हि तो थि
तो भी पुरी दुनिया हमारे बीच थि
हम कहा कभी एकान्त मै मिले
तो भी कैसे ये अफ़्वाये हमारे बीच थि
हम एक साथ जिए हर साँस

तब भी एकदूसरे की प्रतीक्षा हमारे बीच थी

हमें तोह सिर्फ ओस की बूंदों मै भीगना था

तब भी समंदर की तमन्ना हमारे बीच थी

याद कर वो पवित्र पाप का एक एक पल

कैसी पूनम की चाँद की चांदनी हमारे बीच थी

एक एक पल दे गया अब वनवास सदीओ का खालीपन

क्या करू

एक पल के लिए मंथरा हमारे बीच थी .....






Sunday, October 24, 2010

सोचते है तुम्हे ........


अक्सर सोचा करते है, तुम्हे
सुबह-शाम .... सोते - जागते
डायरी को शब्दों से भरते
कभी....किसी किताब के
पन्नो को पलटते - पलटते
उड़ती नीली-पीली पतंगों के
धागों से उलझते हो, सोच में
सोचते है ...क्यों सोचते है सोचते
जंगली कंटीले बेंगनी फूलो से
अक्सर चुभ जाते हो, सोच में
कई बार सोचा....दूर रखे तुम्हे
इस बेमतलबी सोच के दायरों
से गर्म हथयलियो पर बर्फ पिघले
ऐसा कुछ महसूस कर रुक जाते
टिमटिमाते दियो को इकटक देखे
तो ना जाने क्यों आंसू बन छलक जाते
सोचते है....क्या तुम भी सोचेते हो
जैसे हम सोचते है, हर घडी तुम्हे

Monday, October 11, 2010

इश्क है तुज से आज भी ....


मेरे जिस्म मे जान जबतक रहेगी
तेरा नाम सांसोंमें घुलता रहेगा
महकती रहेगी जिंदगी यूं हमेशा
और ये समा भी महकता रहेगा

जैसे कोई हो युगोंकी तपस्या
ये सफ़र भी तो वै्से ही चलता रहेगा
मिले ना मिले मंजिलोंका सहारा
रास्ता मेरे कदमोंको मिलता रहेगा

मेरे चाहतोंकी गहराईयोंमे
तेरे दिल का अक्स यू खिलता रहेगा
कोई रंजिशे, गम या कोई गिला भी
दुआओंमे मेरी बदलता रहेगा

कहते है सच्चे दिल से जो चाहो
एक दिन तुम्हारा वो बनके रहेगा
पिघलता है पत्थर भी यारा जहांपे
इश्क तो मोम है, वो पिघलके रहेगा


पलक

Tuesday, September 21, 2010

ले जाना..!!!!!


मेरी रातों की राहत दिन का इत्मिनान ले जाना,
तुम्हारे काम आ जायेगा, ये सामान ले जाना,

तुम्हारे बाद क्या रखना खुद से वास्ता कोई?
तुम अपने साथ मेरा उम्र भर का मान ले जाना,

कांच के कुछ रेज़े पड़े हैं फर्श पर, चुन लो,
अगर तुम जोड़ सकते हो तो ये गुलदान ले जाना,

उधर अल्मारिओं में चाँद अव्राक परेशां हैं,
मेरे ये अधूरे ख्वाब मेरी जान ले जाना,

तुम्हे ऐसे तो खाली हाथ रुखसत कर नहीं सकते,
पुरानी दोस्ती है इसकी कुछ पहचान ले जाना,

इरादा कर लिया है तुमने गर सच मुच बिछड़ने का,
तो फिर अपने ये सारे वादा-ओ-पैमान ले जाना,

अगर थोड़ी बहुत है शायरी से उनको दिलचस्पी,
तो उनके सामने तुम मेरा ये दीवानापन ले जाना...!!!

Monday, September 13, 2010

मेरी पहचान ......!!!


बेचैन पलों में सुकून हूँ,
जो हद से गुज़र जाये वो जूनून हूँ,
रिश्तों का एहसास हूँ,
कभी बेनाम हूँ, पर फिर भी ख़ास हूँ में!
हाथ उठें तो में इबादत,
झुकती पलकों की में हया हु ,
अल्हड अटखेलियाँ और शरारत,
कैसे कोई मुझे करे बया ....



पलक 

Monday, September 6, 2010

daughter........


દીકરો વંશ છે
દીકરી અંશ છે

દીકરો આન છે
દીકરી શાન છે

દીકરો તન છે
દીકરી મન છે

દીકરો સંસ્કાર છે
દીકરી સંસ્ક્રુતિ છે

દીકરો આગ છે
દીકરી બાગ છે

દીકરો દવા છે
દીકરી દુઆ છે

દીકરો ભાગ્ય છે
દીકરી વિધાતા છે

દીકરો શબ્દ છે
દીકરી અર્થ છે

દીકરો ગીત છે
દીકરી સંગીત છે

દીકરો પ્રેમ છે
દીકરી પૂજા છે

દીકરી એજ દીકરો છે.