
कभी तुम लौट के आओगे
मुझे बस इतना समझाओ
कहाँ से सीख ली तुम ने
अदा मुझ को भुलाने की
मुझे बस इतना समझाओ
कहाँ से सीख ली तुम ने
अदा मुझ को भुलाने की
तुम्हें मुझ से शिकवा था
या कोई भी शिकायत थी
ज़हमत तो ज़रा सी थी
ना की कभी कोशिश बताने की
भला यूँ छोड़ के
कोई अपनों को जाता है
भला उही कोई किसी को
जीवन भर रुलाता है
भला उही कोई किसी को
जीवन भर रुलाता है
अभी तो रेत गीली है
अभी सब नक्श बाकी है
गए क़दमों पे लौट आओ ...
अभी सब नक्श बाकी है
गए क़दमों पे लौट आओ ...
मुझे बस इतना समझाओ
कहाँ से सीख ली तुम ने ...अदा मुझ को भुलाने उही ...!!!!!!! PG




